sad poem in hindi for love

sad poetry in hindi | मिलना मुकद्दर मे ना था | sad poem in hindi for love

sad poetry in hindi

मिलना मुकद्दर मे ना था

हमारा मिलना मुकद्दर मे ना था
लोगो को ये रिश्ता गवारा ना था
तरसती है बाहें आज भी गले लगाने के लिए तुझे
तेरे सिवा मेरा यहाँ और कोई सहारा ना था
रखा है तूने संभाल कर मुझे आज भी अपने दिल मे
तू जानता था मेरा इस दुनिया मे कोई ठिकाना ना था
ऐसा इश्क़ क्यो किया मुझसे तूने जानेजा
जिसका नशा कभी इस दिल से जाना ना था
मैं आऊंगी मिलने तुझसे मेरा इंतज़ार करना
सच था ये, कोई बहाना ना था
हिज्र बनकर आज भी ज़िंदा है प्यार हमारा
एक दूजे के दिल मे ………….
ये सच्चा सौदा रूहों का था, इसमे कुछ
हमारा, तुम्हारा ना था

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