sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | अश्कों के साथ खुद को दिन रात बहाया है

sad poetry in hindi on love

अश्कों के साथ खुद को दिन रात बहाया है

अश्कों के साथ खुद को दिन रात बहाया है
मोहब्बत करने का कर्ज मैंने भी चुकाया है

उठाया है बदनामी का बोझ मैंने अकेले ने
पर तेरा नाम किसी को न बताया है

गज़ल बनकर गम निकला मेरे लबों से
आंसू बनकर दर्द आंखों में उतर आया है

अकेला तू ही नही चला कांच के रास्तों पर
इन रास्तों पर मैंने भी अपना लहूं बहाया है

तेरे बाद महफिलों से रहने लगा हूं दूर मैं
और तन्हाईयों से एक नया रिश्ता बनाया है

गुजरता हूं जब भी अपने गांव की गलियों से
तो कसम से दोस्त तू याद बहुत आया है

sad poetry in hindi on love
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