sad poetry in hindi on love

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | मेरी जान आज भी मेरे सनम में रहती है

sad poetry in hindi on love

मेरी जान आज भी मेरे सनम में रहती है

मेरी जान आज भी मेरे सनम में रहती है
और उसकी मोहब्बत मेरे बदन में रहती है

जो निकल रही है खुशबू दर और दीवारों से
दोस्तों ये उसकी यादें है जो इस घर में रहती है

रहती है बस एक ही शिकायत मोहब्बत से
पाती नही मंजिल वो उम्रभर सफर में रहती है

मिलना चाहते हो अगर मेरी महबूबा से तुम
तो वो सिर्फ और सिर्फ मेरी ग़ज़ल में रहती है

उतरती है कोरे पन्नों पर नज़्म बनकर रोज़
ख्वाब बनकर हर वक्त मेरी नजर में रहती है

रहती है कसक बनकर चुबती दिल में हमेशा
और मोहब्बत बनकर वो मेरी तलब में रहती है

sad poetry in hindi on love
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sad poetry in hindi on love
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