sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | तुमको देखे बिना आज कितने ही बरस निकले

sad poetry in hindi on love

तुमको देखे बिना आज कितने ही बरस निकले

तुमको देखे बिना आज कितने ही बरस निकले
पर आज भी तेरी हर याद पर मेरा दम निकले

मैंने भेजे कई पैगाम उन सब के हाथों से तुमको
जो भी मुसाफ़िर तेरे गांव के सफर पर निकले

मोहब्बत में उसको मनाने के लिए दोस्तों आज
पैरों में अपने बांधकर घुंघरूं घर से हम निकले

या तो वो कबूल करे मेरी मोहब्बत को दिल से
या तो दिल से उसकी मोहब्बत का आज भरम निकले

निकले है मेरे दिए गुलाब आज उसकी किताब से
मगर देखा आइना मैंने तो मेरे जिस्म से उनके दिए ज़ख्म निकले

मोहब्बत में तेरे हर सितम के सदके है हम यारा
पर हमारी जुबान से तो दुआ तेरे लिए हरदम निकले

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