sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | जब जब भी उसे देखूं तो बहार सी लगे

sad poetry in hindi on love

जब जब भी उसे देखूं तो बहार सी लगे

जब जब भी उसे देखूं तो बहार सी लगे
उसके पहलू में जिंदगी आबाद सी लगे

पल पल में रंग बदलती है वो
कभी सुबह सी लगे तो कभी शाम सी लगे

लगे चेहरा उसका किसी शायर की शायरी
तो बदन उसका गजलों की किताब सी लगे

वो तो सुराही है शराब से भरी हुई दोस्तों
जो मेरे लबों तक आने को बेकरार सी लगे

जिसने रोक रखी है गिरने से मेरे घर की छत
मुझे आंगन में खड़ी उस दीवार सी लगे

आदत हो चुकी है सासों की तरह उसकी
उसके बिना मुझे अपनी जिंदगी बेजान सी लगे

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