sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | कौन डरता है जग-हँसाई से

sad poetry in hindi on love

कौन डरता है जग-हँसाई से

कौन डरता है जग-हँसाई से
डरता हूं तो सिर्फ तेरी रुसवाई से

जब भी देखता हूं मैं तेरी आंखों में
तो मुंह मोड़ लेता हूं बेवफाई से

कह जाता है तू बात दिल की मुझसे
यारा कितनी ही सच्चाई से

एक दिन मैं निकाल लाऊंगा
प्यार सारा तेरे दिल की गहराई से

छोड़ गया है तू अपना ख़्वाब
मेरी नींदों में बड़ी सफाई से

फूलों ने सीखी है सारी अदाएं
यारा इक तेरी अंगड़ाई से

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