sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | क्यूं न एक तारा फलक से उठाया जाए

sad poetry in hindi on love

क्यूं न एक तारा फलक से उठाया जाए

क्यूं न एक तारा फलक से उठाया जाए
फिर उसको तेरे माथे पर सजाया जाए

रखा जाए तेरे होंठों को पहले प्यासा
फिर उनको धीरे धीरे मेरे लबों तक लाया जाए

तेरी झील से गहरी आंखों में यारा
क्यूं न आज मेरा जिस्म डुबाया जाए

तू उतर जाए नदी बनकर मुझ में कहीं
और मुझे कश्ती बनाकर तुझ में बहाया जाए

बड़े नसीबों से मिलती है ये रात मिलन की
क्यूं न इसमें कोई गुल मोहब्बत का खिलाया जाए

उलझा हुआ है कब मेरा दिल तेरी जुल्फों में
चलो बैठकर आज उसको सुलझाया जाए

sad poetry in hindi on love
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