sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | बहका बहका सा आज मंजर लगता है

sad poetry in hindi on love

बहका बहका सा आज मंजर लगता है

बहका बहका सा आज मंजर लगता है
उसकी आंखों में ठहरा समंदर लगता है

पेड़,परिंदे,फूल,तितलियां सब मदहोश है
सब पर चढ़ा उसकी मोहब्बत का असर लगता है

हर कदम पर हो जिसमे साथ महबूब का
कितना आसान वो सफर लगता है

जहां जाकर होगी मेरी हर मुराद पूरी दोस्तों
मुझ को वो एक उसका ही दर लगता है

जिसको उसने आबाद किया था अपनी मोहब्बत से
उस दिल में आज भी उसकी यादों का नगर लगता है

उसने तो मजाक में कह दिया था छोड़ने का
मुझे तो हर पल उसे खोने का डर लगता है

sad poetry in hindi on love
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