sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | उभर आता है तेरा चेहरा जब कमरे की दीवार से

sad poetry in hindi on love

उभर आता है तेरा चेहरा जब कमरे की दीवार से

उभर आता है तेरा चेहरा जब कमरे की दीवार से
बिखर जाता हूं तब अंदर ही अंदर मैं बेहिसाब से

पिरोने लगता हूं तुझको फिर अल्फाजों की डोर में
चुरा लता हूं कुछ हसीन पल अतीत की किताब से

भरी पड़ी है अलमारी चूड़ी,पायल,बिंदी,काजल से
आज भी नही भूलता तेरे लिए कुछ लेना बाजार से

ये तेरी मोहब्बत का ही तो करम है मुझ पर यारा
जो आज तक नही जाग पाया हूं मैं तेरे ख्वाब से

तेरी नजरों के जिन तीरों ने घायल किया था मुझको
मेरा जिस्म आज भी भरा पड़ा है उनके दाग से

क्या कमी थी मेरे प्यार में क्यूं चला गय तू छोड़कर
रोज करता हूं एक ही सवाल अपने परवर दिगार से

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