sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | उसे खोने का क्यूं मुझे गम रहता है

sad poetry in hindi on love

उसे खोने का क्यूं मुझे गम रहता है

उसे खोने का क्यूं मुझे गम रहता है
वो तो आज भी कहीं न कहीं मेरे अंदर रहता है
और मैं पगली ढूंढती रही बाहर उसको
जो मेरे दिल में बसा कर अपना घर रहता है

जो पेड़ लगाया था उसने आंगन में मेरे
वो बैठा है उसकी छाव में मुझे ये भरम रहता है
जिंदगी की इस कड़ी धूप में आज भी
वो साया बनकर मेरे साथ हर दम रहता है

लोग जाते है मंदिर, मस्जिद, मक्का, काबा
मुझे जाना है वहां, जहां मेरा सनम रहता है
उड़ गया मेरी रूह का परिंदा देस को उसके
मेरे पास तो अब ये खाली बदन रहता है

उसे खोने का क्यूं मुझे गम रहता है
वो तो आज भी कहीं न कहीं मेरे अंदर रहता है

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