sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | मुझसे अब ये इश्क़ का बोझ उठाया नही जाता

sad poetry in hindi on love

मुझसे अब ये इश्क़ का बोझ उठाया नही जाता

मुझसे अब ये इश्क़ का बोझ उठाया नही जाता
नगमा गम का अब और सुनाया नही जाता
निकलते है तड़प तड़प के दिन और रात मेरे
मुझसे अब अपने दिल को और दुखाया नही जाता

दम घुटने लगा है अब मेरा तेरे शहर की गलियों में
अब मुझसे यहां और वक्त बिताया नही जाता
कोसने लगी है अब तो मेरी आँखें भी मुझको
कहती है उस बेवफा के लिए अब एक भी आँसूं बहाया नही जाता

तुम तो हो चुके हो मसरूफ अपनी जिंदगी में
अब तेरे नाम से महफिलों में मुझसे रंग जमाया नही जाता
रखने के लिए जिन्दा तेरे वजूद को अपनी गजलों में
अपने हाथ से खुद को अब और मिटाया नहीं जाता

मुझसे अब ये इश्क़ का बोझ उठाया नही जाता
नगमा गम का अब और सुनाया नही जाता

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