sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | वो बंजारन कहा ठहरी है

sad poetry in hindi on love

वो बंजारन कहा ठहरी है

वो बंजारन कहा ठहरी है
इन दिन जो हमारे गांव में रह रही है
पानी भरने रोज आती है नदी पर
आँखें जिसकी झील से भी गहरी है

मासूम चेहरा, भोलापन, सिर पर आंचल
और रंग सूरज जैसा सुनहरी है
कल उसने कहा हमारी नही निभ सकती
मैं साधारण लड़की और तू थोड़ा शहरी है

मैं उसको कैसे भुल जाऊं दोस्तों
वो मेरे अंदर लहू बनकर बह रही है
उसका काफ़िला आज रवाना हो रहा है गांव से
और उसकी आँखें मुझको अलविदा कह रही है

वो बंजारन कहा ठहरी है
इन दिन जो हमारे गांव में रह रही है

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