sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | तेरे इंतजार में चिराग आंगन में जल रहा है

sad poetry in hindi on love

तेरे इंतजार में चिराग आंगन में जल रहा है

तेरे इंतजार में चिराग आंगन में जल रहा है
धुआं मेरे अरमानों का उस में से निकल रहा है
चांदी चमकने लगी है अब बालों में मेरे
मेरे हुस्न को बुढ़ापा धीरे धीरे निगल रहा है

भटक चुकी हूं तेरे यादों के शहर में
तेरे गमो की धूप से जिस्म मेरा पिघल रहा है
निकलता था जिन लबों से मोहब्बत का तराना कभी
आज वो तराना तन्हाई में बदल रहा है

जिसको आकार दिया था तेरी मोहब्बत ने
वो जिस्म फिर से मिट्टी में ढल रहा है
लगी रहती है उसके चारो तरफ भीड़ लोगो की
कहते है उसमे फूल तेरी मोहब्बत का खिल रहा है

तेरे इंतजार में चिराग आंगन में जल रहा है
धुआं मेरे अरमानों का उस में से निकल रहा है

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