sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | हम एक नजर से बच कर निकला करते थे

sad poetry in hindi on love

हम एक नजर से बच कर निकला करते थे

हम एक नजर से बच कर निकला करते थे
उसकी जुल्फों के बादल से हट कर निकला करते थे
उसकी पायल की आवाज अक्सर बुलाती थी हमको
हम भी कानो पर हाथ रख कर निकला करते थे

लिखा करते थे जो गज़ले उसके हुस्न की तारीफ़ में
उसकी महफ़िल में शरेआम वो पढ़ कर निकला करते थे
जिसने पागल कर रखा था सारा शहर अपने पीछे
हम उसकी आँखों से आँसूं बन कर निकला करते थे

निकला करते थे जब भी वो बाहर सोलह श्रृंगार करके
हम भी सावन की तरह खूब बरस कर निकला करते थे
हमारी एक झलक के लिए घंटों खड़े रहते थे वो गली में
हमारे ना दिखने पर गली से वो तड़प कर निकला करते थे

हम एक नजर से बच कर निकला करते थे
उसकी जुल्फों के बादल से हट कर निकला करते थे

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