sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | किस से कहूं आज मैं अपना गम

sad poetry in hindi on love

किस से कहूं आज मैं अपना गम

किस से कहूं आज मैं अपना गम
किस किस से छुपाऊं मैं आंखे नम
हो रही है सावन की पहली बारिश बाहर
और मेरे अंदर लगी हुई है अगन
पिछली बार वादा करके गया था, आने का
इस बार भी ना आया मेरा सनम
हर बार बनाता है बहाने नए नए मुझसे
हर बार तोड़ देता है दी हुई कसम
पत्तझड के मौसम सी हो गई है जिंदगी मेरी
जुदाई के ज़ख्मों से भर गया है बदन
जब भी हवा के झोंके से खुलता है दरवाजा
मुझे होता है उसके आने भरम
उसके बाद छोड़ दिया परिंदों ने दाना खाना
पास वाली झील के मुरझा गए सारे कमल
उदासी हर वक्त खड़ी रहती है सिरहाने मेरे
जिंदगी से मेरा अब उठ गया है मन
किस से कहूं आज मैं अपना गम
किस किस से छुपाऊं मैं आंखे नम

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