sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | उसने अगर मेरी कभी ख्वाहिश नही की

sad poetry in hindi on love

उसने अगर मेरी कभी ख्वाहिश नही की

उसने अगर मेरी कभी ख्वाहिश नही की
तो मैंने भी कभी उससे गुज़ारिश नही की
वो हाथ छुड़ाकर जाना चाहता था मेरा
मैंने भी जाने दिया, उसे रोकने की कोशिश नही की

जुदा हो रहे थे जब हम दोनो
आंखे नम थी मेरी पर मैंने जाहिर नही की
अगर मेरी मोहब्बत सच्ची थी तो फिर
क्यूं कुदरत ने हमे मिलने की कोई साजिश नही की

क्यूं फटा नही सीना धरती का मेरे दुख पर
क्यूं बादलों ने आज बारिश नही की
खुदा मांगा ही क्या था तुमसे बस एक मोहब्बत
उसकी भी तूने मेरी झोली में बख्शीश नही की

उसने अगर मेरी कभी ख्वाहिश नही की
तो मैंने भी कभी उससे गुज़ारिश नही की

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