sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | इश्क़ के दर्द का तुझे पता ही नही

sad poetry in hindi on love

इश्क़ के दर्द का तुझे पता ही नही

इश्क़ के दर्द का तुझे पता ही नही
तू इस गली से कभी गुजरा ही नहीं
रोशन करने के लिए अपने महबूब का घर
चिराग़ बनकर तू कभी जला ही नही

खुद को बर्बाद किए बिना ए दोस्त
यहां कोई रांझा, मजनू बना ही नही
महबूब की आंखों में देखते है रास्ता जन्नत का
महबूब के सिवा उनका कोई खुदा ही नही

दो जिस्म और एक जान हो जाते है
इसमें कोई एक दूसरे से जुदा ही नहीं
जो पल पल उठता है देखकर महबूब को
उस जैसा दुनिया में कोई नशा ही नहीं

इश्क़ के दर्द का तुझे पता ही नही
तू इस गली से कभी गुजरा ही नहीं

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