sad poetry in hindi

sad poetry in hindi on love | sad poetry in hindi | एकबार भी पलट कर नही देखा

sad poetry in hindi on love

एकबार भी पलट कर नही देखा

उसने जाते हुए मुझे एकबार भी पलट कर नही देखा
मैं बाहें फैलाए खड़ा रहा और उसने लिपट कर नही देखा
उसको क्या एहसास जुदाई की तकलीफ का यारों
उसने कभी इस तलवार से कट कर नही देखा

मैं आज तक तेरे लौटने की उम्मीद लगाए तेरे इंतजार में बैठा हूं
मैंने आज तक दुनिया को तेरे चेहरे से हट कर नही देखा
तेरे जाने के बाद ऐसी बिखर गई है जिंदगी मेरी
तेरे जाने के बाद जानां फिर मैने कभी सिमट कर नही देखा

देखा है पल पल, हर पल, हर दिन इस जुनून को बढ़ता हुआ
मैं अपने इश्क़ को हीर रांझा लैला मजनू से घट कर नही देखा
समा गया है इश्क़ इबादत की तरह मेरी रूह में
मैने कभी इन ढाई आखर को रट कर नही देखा

उसने जाते हुए मुझे एकबार भी पलट कर नही देखा
मैं बाहें फैलाए खड़ा रहा और उसने लिपट कर नही देखा

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